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В продолжение утреннего поста. Кто-то начал писать мне в комментах "мужчины не любят вообще разговаривать" Это не так! Мужчины могут не любить разговаривать с вами. Это другой вопрос. А вот почему отношения доведены до такой стадии - надо разбираться. Чаще когда всякий разговор в итоге заканчивается ором и обвинениями и претензиями, то мужчина мгновенно готов к обороне, стоит вам только открыть рот. Продолжая обсуждать варианты восстановления отношений в паре из разговора с моим мужем... ⠀ 📍 Находить подходящий момент для разговоров 📍 Не выдергивать человека из его занятия фразой "Брось, Нам надо поговорить" 📍 Подловить на хорошем настроении 📍 Разговор об отношениях строить легко 📍 Шутить ⠀ Любой тяжелый разговор, проведенный в трудный момент с помощью юмора - это вариант достучаться. Уйти от привычного сценария выяснения отношений. ⠀ И второе. ⠀ Общение с другими парами нередко дает мужчине повод подумать "а моя-то не так плоха" Что требуется от нас: 💧 нравиться мужчинам в вашей компании 💧 быть легкой и игривой ⠀ Иногда достаточно ему услышать "а твоя-то лучше моей... моя курица, а твоя молодец! красотка!" И все! Считайте механизм запущен в самолюбивой и собственнической мужской голове 😂😂😂

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राजस्थान के राठौड़ राजवंश की कुलदेवी चक्रेश्वरी, राठेश्वरी, नागणेची या नागणेचिया के नाम से प्रसिद्ध है । नागणेचिया माता का मन्दिर राजस्थान में जोधपुर जिले के नागाणा गांव में स्थित है। यह मन्दिर जोधपुर से 96 किमी. की दूरी पर है। प्राचीन ख्यातों और इतिहास ग्रंथों के अनुसार मारवाड़ के राठौड़ राज्य के संस्थापक राव सिन्हा के पौत्र राव धूहड़ (विक्रम संवत 1349-1366) ने सर्वप्रथम इस देवी की मूर्ति स्थापित कर मंदिर बनवाया । . . कर्नाटक से लाई गई थी नागणेची माता की प्रतिमा राजा राव धूहड़ दक्षिण के कोंकण (कर्नाटक) में जाकर अपनी कुलदेवी चक्रेश्वरी की मूर्ति लाये और उसे पचपदरा से करीब 7 मील पर नागाणा गाँव में स्थापित की, जिससे वह देवी नागणेची नाम से प्रसिद्ध हुई। नमक के लिए विख्यात पचपदरा बाड़मेर जोधपुर सड़क का मध्यवर्ती स्थान है जिसके पास (7 कि.मी.) नागाणा में देवी मंदिर स्थित है। . . जोधपुर में नहीं किया जाता था नीम की लकड़ी का प्रयोग अष्टादश भुजाओं वाली नागणेची महिषमर्दिनी का स्वरुप है। बाज या चील उनका प्रतीक चिह्न है,जो मारवाड़ (जोधपुर),बीकानेर तथा किशनगढ़ रियासत के झंडों पर देखा जा सकता है। नागणेची देवी जोधपुर राज्य की कुलदेवी थी। चूंकि इस देवी का निवास स्थान नीम के वृक्ष के नीचे माना जाता था अतः जोधपुर में नीम के वृक्ष का आदर किया जाता था और उसकी लकड़ी का प्रयोग नहीं किया जाता था। . . नागणेचिया माता मन्दिर का प्रचलित इतिहास एक बार बचपन में राव धुहड जी ननिहाल गए। वहां उन्होने अपने मामा का बहुत बडा पेट देखा । बेडोल पेट देखकर वे अपनी हँसी रोक नही पाएं और जोर जोर से हँसने लगे। इस पर उनके मामा को गुस्सा आ गया और उन्होने राव धुहडजी से कहा की सुन भानजे ! तुम तो मेरा बडा पेट देखकर हँस रहे हो, किन्तु तुम्हारे परिवार को बिना कुलदेवी देखकर सारी दुनिया हंसती है। तुम्हारे दादाजी तो कुलदेवी की मूर्ति भी साथ लेकर नही आ सके, तभी तो तुम्हारा कही स्थाई ठोड-ठिकाना नही बन पा रहा है। . . मामा के वचन चुभ गए मामा के ये कड़वे परंतु सच्चे बोल राव धुहडजी के ह्रदय में चुभ गये। उन्होने उसी समय मन ही मन निश्चय किया कि मैं अपनी कूलदेवी की मूर्ति अवश्य लाऊंगा। वे अपने पिताजी राव आस्थानजी के पास खेड लोट आए। किन्तु बालक धुहडजी को यह पता नही था कि कुलदेवी कौन है ? उनकी मूर्ति कहा है ?और वह कैसे लाई जा सकती है ? उन्होनें तपस्या कर देवी को प्रसन्न करने का निश्चय किया। . . #rajputanahistory Remaining part in comment box 👇👇

Blessed Sunday to you all😘

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